8 साल में पेट्रोल 45% तो डीजल की कीमत 75% तक बढ़ी, केंद्र की कमाई में 4 गुना इजाफा

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2009 में आमिर खान की एक फिल्म आई थी. नाम था- थ्री इडियट्स. इस फिल्म में राजू रस्तोगी (शरमन जोशी) की मां एक डायलॉग मारती हैं, ‘पनीर तो एक दिन सुनार की दुकान पर इत्ती सी थैली में मिला करेगा.’ आज जिस तेजी से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए सोशल मीडिया पर ऐसी ही बातें अब पेट्रोल के लिए की जा रही हैं.

बीते 20 दिन में पेट्रोल और डीजल की कीमत 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई है. पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के महंगे होने का तर्क दिया जा रहा है. तेल कीमतों में आग से आम आदमी की मुश्किलें भले बढ़ गई हों, लेकिन इससे सरकारी खजाना खूब भरता है, फिर चाहे वो केंद्र सरकार का हो या राज्य सरकारों का.

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन आने वाले पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक, 8 साल में पेट्रोल की कीमत 45% और डीजल की कीमत 75% तक बढ़ गई है. 1 अप्रैल 2014 को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 72.26 रुपये और डीजल की कीमत 55.49 रुपये प्रति लीटर थी.

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8 साल बाद 11 अप्रैल 2022 को दिल्ली में पेट्रोल 105.41 रुपये और डीजल 96.67 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. इन 8 सालों में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी से केंद्र सरकार की कमाई करीब चार गुना तक बढ़ गई है.

पीपीएसी के मुताबिक, 2014-15 में केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी से 99 हजार 068 करोड़ रुपये कमाए थे. 2020-21 में उसकी 3.73 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. 2021-22 में अप्रैल से सितंबर तक केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी से 1.70 लाख करोड़ रुपये कमा लिए.