दिल्ली वालों को मिलेगा बिजली के बिलों को देखकर झटका, आइये विस्तार से समझे

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दिल्लीवासियों को आने वाले दिनों में बड़ा झटका लगने वाला है. दिल्ली विद्युत विनिमायक आयोग यानि DERC ने दिल्ली के अलग-अलग डिस्कॉम के लिए पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट यानि PPAC की घोषणा कर दी है.

ये दरें 10 जून से लागू हो रही हैं. यानी आने वाले बिल में बढ़ी हुई दर लागू हो जाएगी.नए आदेश के मुताबिक बीएसईएस यमुना इलाके में 6 फीसदी, बीएसईएस राजधानी के इलाकों में 4 फीसदी और टाटा पावर के अंदर आने वाले इलाकों में 2 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की जाएगी.

डीईआरसी ने अपने 10 जून को जारी किए गए आदेश में कहा है कि दिल्ली में बिजली वितरण कंपनियों ने मांग की थी कि इंपोर्ट किए जाने वाले कोयले और गैस की कीमतें बढ़ी हैं.

ऐसे में 24 घंटे बिजली आपूर्ति और कैश फ्लो बनाए रखने के लिए दरें बढ़ानी जरूरी है.बीवाईपीएल ने 17.16%, और बीआरपीएल ने 20.22% बढ़ोत्तरी की मांग सितंबर 2022 तक के लिए की थी.

जबकि टाटा पावर ने मार्च 2023 तक के लिए 25% का इजाफा मांगा था. कमीशन ने डिस्कॉम की इन मांगों पर विचार किया और पाया कि गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने से थर्मल पावर प्लांट को अपनी क्षमता बढ़ानी पड़ी,

लेकिन घरेलू कोयले की कमी की वजह से जेनेरेशन पर असर पड़ा. 28 अप्रैल को केंद्र सरकार ने इंपोर्ट होने वाले कोयले की 10 फीसदी ब्लेंडिंग का आदेश दिया. जबकि उसे 18 मई को 30 फीसदी तक बढ़ाया

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जो अगले साल 31 अगस्त तक लागू रहेगा. ऐसा करने के लिए बिजली के खरीदारों से अनुमति की जररूत नहीं है.उसके बाद सीईआरसी यानि केंद्रीय विद्युत विनिमायक आयोग ने भी एक पेपर जारी कर बताया कि 30% ब्लेंडिंग की वजह से बिजली की कीमत 100 फीसदी तक बढ़ सकती है.

अप्रैल महीने के लिए शॉर्ट टर्म पावर परचेज कॉस्ट को 12 रुपए प्रति यूनिट तक तय किया गया. 100 फीसदी डिमांड को पूरा करने के लिए डिस्कॉम ने अप्रैल के महीने में 240 मिलियन यूनिट पावर एक्सचेंज में खरीदे,

जो कि मई के महीने में बढ़कर 450 मिलियन यूनिट पहुंच गया. इस वजह से मई के महीने में पहली बार 7000 मेगावाट बिजली की मांग पहुंचने के बावजूद उसे पूरा किया गया.

अप्रैल के महीने में BRPL, BYPL और TPDDL ने क्रमश: 168 करोड़, 132 करोड़ और 61 करोड़ का नुकसान उठाया, जबकि मई के महीने में BRPL को 166 करोड़ का नुकसान हुआ

उसी दौरान BYPL को 38 करोड़ का सरप्लस रहा.BRPL ने कहा कि वो बिजली जेनेरेशन कंपनियों के 74 करोड़ का भुगतान नहीं कर पाई है.

BYPL ने भी ये डीईआरसी को लिखा कि अप्रैल और मई महीने में उसपर 163 करोड़ की देनदारी है और वहीं TPDDL ने भी लिखा कि उसने 423 करोड़ शॉर्ट टर्म लोन लेकर चुकाए हैं.

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इन्हीं सबको ध्यान में रखते हुआ डीईआरसी ने 10 जून के आदेश में तत्काल प्रभाव से BRPL, BYPL और TPDDL के लिए कीमतों में बढ़ोत्तरी की घोषणा कर दी और कहा कि ये आदेश 31 अगस्त 2022 तक लागू रहेंगे, जिसके बाद इसकी फिर से समीक्षा की जाएगी.

क्या बाकी राज्यों में भी बढ़ेंगे दाम?

बिजली विभाग के अधिकारी के मुताबिक बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) ने कोयले और गैस की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के चलते PPA कॉस्ट में भी इजाफा किया गया है.

दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने भी इसकी मंजूरी दे दी है. हालांकि, DERC ने बढ़ोतरी के बाद कोई प्रतिक्रया नहीं दी है. PPAC का फॉर्मूला देश के 25 से ज्यादा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है.

इसलिए दिल्ली में बढ़ी कीमतों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या बाकी राज्य भी इसे फॉलो करेंगे.

जानिए, क्या होता है PPAC?

दरअसल, PPAC एक तरह का अधिभार है, जो बिजली कंपनियों को बाजार संचालित ईंधन की लागत में परिवर्तन होने पर क्षतिपूर्ति के लिए लिया जाता है.

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यह कुल एनर्जी कॉस्ट और बिजली बिल के फिक्स्ड चार्ज पर अधिभार के रूप में लागू होता है. एजेंसी के आधिकारिक सूत्र के मुताबिक DERC ने दिल्ली में 11 जून से 4 फीसदी PPAC बढ़ाने की मंजूरी दी है.

डिस्कॉम के मुताबिक 9 नवंबर 2021 को बिजली मंत्रालय ने निर्देश जारी किया था, जिसके मुताबिक सभी राज्यों के नियामक आयोग (दिल्ली के मामले में DERC) को बिजली क्षेत्र का मैकेनिज्म सुनिश्चित करने के लिए टैरिफ में ईंधन और बिजली खरीद लागत को स्वत: पास करने के लिए एक तंत्र बनाना होगा

BJP का आप सरकार पर निशाना

भाजपा विधायक और दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने केजरीवाल सरकार से बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार

पीपीएसी के नाम पर पिछले दरवाजे से बिजली की कीमतें बढ़ा रही है. उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने एक तरफ बिजली की सब्सिडी की योजना पर शर्तें लगाई हैं तो दूसरी तरफ बिजली खरीद समायोजन लागत के नाम पर बिजली के दाम बढ़ा दिए हैं.

उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में घरेलू और वाणिज्यिक बिजली दरें पूरे देश में सबसे ज्यादा हैं. दिल्ली के घरेलू उपभोक्ताओं को करीब 8 रु. प्रति यूनिट और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को 14 रु. तक का भुगतान करना पड़ता है.