दिल्ली में 80 एकड़ में बनेगी इलेक्ट्रानिक सिटी, सबसे पहले इन नौ उत्पादों का होगा कारोबार

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दिल्ली के बापरौला में 80 एकड़ में इलेक्ट्रानिक सिटी बनेगी। दिल्ली सरकार की ओर से बनाई जाने वाली इलेक्ट्रानिक सिटी की कनेक्टिविटी ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे (ईपीई-वे) से होगी। यहां से लोग एक्सप्रेस-वे पर 30 से 35 मिनट में पहुंच जाएंगे। इसका सबसे अधिक लाभ इस सिटी में कारोबार करने वाले उद्यमियों को मिलेगा। यह स्थान द्वारका के पास है, जो हवाई अड्डे के नजदीक है।

इस सिटी को दो साल में तैयार किया जाएगा। इसे विकसित करने की डिजाइन बनाने वाली सलाहकार कंपनी के लिए दिल्ली औद्योगिक एवं ढांचागत विकास निगम (डीएसआइआइडीसी) टेंडर करने की तैयारी में है।

सरकार की योजना है कि देशी-विदेशी विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों के साथ राजधानी में आधुनिक इलेक्ट्रानिक सिटी बनाई जाए। इसके लिए दिल्ली संवाद एवं विकास आयोग (डीडीसी) और एपिक इलेक्ट्रानिक प्रोडक्ट फाउंडेशन के साथ करार हो चुका है। करार के मुताबिक बापरौला में 80 एकड़ जमीन पर यह इलेक्ट्रानिक सिटी बनेगी। इसमें प्रमुखता से नौ उत्पादों पर ध्यान दिया जाएगा। यहां टेबलेट्स, वाईफाई राउटर, एलईडी लाइट्स, सीसीटीवी कैमरा, स्मार्ट मीटर, चार्जर इन्वर्टर आदि से संबंधित कारोबार की शुरुआत की जाएगी। साथ ही महिलाओं को रोजगार देने पर अधिक फोकस रहेगा।

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सरकार का लक्ष्य है कि डेढ़ से दो वर्ष के अंदर इलेक्ट्रानिक सिटी बनाने का काम पूरा हो जाए। इसके लिए सरकार प्रत्यक्ष रूप से करीब ढाई हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। सरकार की योजना है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर राजधानी में आधुनिक इलेक्ट्रानिक सिटी बने। सरकार जल्द ही कुछ और कंपनियों और संगठनों के साथ करार करने जा रही है, जिसके जरिये उत्पाद के डिजाइन, निर्माण, बिक्री, मरम्मत और अन्य सेवाओं के लिए निवेश आकर्षित किया जाएगा।

इलेक्ट्रानिक उत्पाद मैन्युफैक्चरिंग से 80 हजार रोजगार का लक्ष्य: उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी 2022-23 के रोजगार बजट के दौरान घोषणा की थी कि इलेक्ट्रानिक उत्पाद मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से पांच वर्ष में 80 हजार रोजगार पैदा करने के लिए दिल्ली के बापरौला में इलेक्ट्रानिक सिटी की स्थापना की जाएगी। रोजगार सृजन और लोगों को महामारी के आर्थिक झटकों से राहत दिलाने के उद्देश्य से दिल्ली के रोजगार बजट का लक्ष्य पांच वर्ष में 20 लाख नौकरियां पैदा करना है।

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