दिल्ली में लाखों ई रिक्शा कर रही है लापरवाही, हो रहे है हादसों का शिकार।

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अधिसंख्य में ये न सिर्फ यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं बल्कि सवारियों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। दिल्ली में हजारों की संख्या में ऐसे ई-रिक्शा हैं

जो बिना पंजीकरण के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। किसी में लाइट नहीं है।दिल्ली की भागती-दौड़ती जिंदगी में मेट्रो से लेकर बस स्टैंड तक पहुंचने के लिए

यूं तो ई-रिक्शा आम नागरिकों के जीवन का हिस्सा सा बन गया है। वर्ष 2011-12 में दिल्ली की सड़कों पर आए ई-रिक्शा को लोगों ने बड़ी राहत के तौर पर देखा। इसका सफर किफायती है।

कम कीमत में उपलब्ध ई-रिक्शा से लाखों लोगों को स्वरोजगार मिला। ये गली-मोहल्ले से लेकर मेट्रो स्टेशन के बाहर तक इतराती मिलती है,

लेकिन जल्द ही नियमों को ताक पर रखकर चलने वाले ये ई-रिक्शा दिल्ली वालों के लिए मुसीबत के साथ जान के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं।

अधिसंख्य में ये न सिर्फ यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि सवारियों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। दिल्ली में हजारों की संख्या में ऐसे ई-रिक्शा हैं

जो बिना पंजीकरण के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। किसी में लाइट नहीं है तो कोई पूरी तरह से जर्जर हाल में है। इन्हें नियंत्रित करने के लिए नियम तो हैं, लेकिन सड़क पर इसे अमलीजामा पहनाना एक चुनौती बन गया है।

क्या है नियम

– ये परिवहन विभाग में रजिस्टर्ड हो। इनके लिए डीएल-1ईआर सिरीज से नंबर जारी होगा।

– परिवहन विभाग द्वारा नोटिफाइड सड़कों पर इनका चलना प्रतिबंधित है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की दिल्ली में ऐसी कोई 235 से अधिक सड़कें है।

– ई-रिक्शा में फ‌र्स्ट एड बाक्स और आग से बचाव के उपकरण हो।

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-परमिट धारक का नाम पता और टेलीफोन नंबर ई-रिक्शा के बाई तरफ लिखा हो।

– इसी तरह परिवहन विभाग का हेल्पलाइन नंबर (42-400-400) और दिल्ली पुलिस का हेल्पलाइन नंबर (1095) भी ई-रिक्शा के बाहर-भीतर लिखा हो।

– पीले रंग की चमकीली पट्टी ई-रिक्शे के चारों तरफ हो।

– हर ई-रिक्शे के पास फिटनेस प्रमाणपत्र हो।

– चालक निर्धारित हरे रंग की वर्दी पहनने के साथ बैज भी लगाए हुए हो।

– चार ही सवारी बैठा सकते हैं।

– ज्वलनशील पदार्थ की ढुलाई प्रतिबंधित है।

हो क्या रहा है

-ये पीडब्ल्यूडी की प्रतिबंधित सड़कों पर भी चल रही है, बाजारों, चौराहों व प्रमुख मार्गों पर ये जाम का प्रमुख कारण बन गए हैं।

-अधिक सवारियों को बैठा रही है।

-अधिकतर के पास फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं है। जर्जर हालत में है।

-रात्रि में हेडलाइट नहीं जलाते, ताकि बैट्री कम खर्च हो, इससे दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

-किशोर तक इसे चलाते हैं, अधिकतर के पास ड्राईविंग लाइसेंस तक नहीं है। ड्रेस व बैज की बात दीगर है।

-40 किलो तक सामान रखने की अनुमति है, लेकिन ई-रिक्शा को लोडर में बदलकर तक सामान ढुलाई की जा रही है।

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स्थिति..

दिल्ली में ई-रिक्शा की मौजूदगी डेढ़ लाख से अधिक है। ई-रिक्शा संबंधित एक मामले में हाई कोर्ट को दिल्ली सरकार ने बताया था कि 22 दिसंबर 2021 तक 80,583 ई-रिक्शा बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के दिल्ली की सड़कों पर चल रहे थे। साथ ही 9,451 ई-रिक्शा फिटनेस खत्म हो गई और सड़कों पर दौड़ रहे थे।

खामियां

– ई-रिक्शा के लिए कोई स्क्रैप नीति नहीं है।

– इसकी अधिकतर उम्र सात वर्ष है। एक अनुमान के मुताबिक 70 प्रतिशत से अधिक चलते ई-रिक्शा इस मियाद को पार कर चुके हैं।

– चार्जिंग के लिए अधिकृत कोई प्वाइंट नहीं है।

– कोई स्टैंड व पार्किंग स्थल तय नहीं है।

– इनके लिए कोई निर्धारित मार्ग नहीं है।

एडवोकेट चरणजीत, अध्यक्ष, (कैपिटल ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन) का कहना है कि ई-रिक्शा दिल्ली की सड़कों के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं।

किसी भी नियम का पालन नहीं हो रहा है। ये लोगों की जान खतरे में रखकर सफर तय करते हैं। सर्वाधिक दुर्घटनाओं के मामले ई-रिक्शा के हैं। फिर भी कोई लगाम लगाने को तैयार नहीं है।”

आशीष कुंद्रा, आयुक्त, परिवहन विभाग का कहना है कि ‘बिक्री प्वाइंट से ही ड्राई¨वग लाइसेंस को अनिवार्य किया गया है। इसका मतलब यह है कि बिना गाड़ी चलाने की योग्यता के ई-रिक्शा नहीं खरीद सकता है।

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इसी तरफ फिटनेस को अनिवार्य किया गया है। इसके उल्लंघन पर जब्ती, चालान जैसी कार्रवाई भी नियमित रूप से हो रही है। ये लोगों की सुविधा के लिए है,

लेकिन किसी भी यात्री के जीवन से खिलवाड़ करने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए परिवहन विभाग व यातायात पुलिस नियमित अभियान चलाती रहती है।”