दिल्ली की सड़कों पर दौड़ी ऐसी बस : ये कैसा सफर… न आवाज और कब स्टॉप पर पहुंची पता ही नहीं

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ये कैसी बस है, न कोई आवाज और कब स्टॉप पर पहुंची, पता ही नहीं चलता। हल्के नीले रंग की बस में मंडी हाउस से सवार हुई एक महिला के सवाल पर कंडक्टर ने जवाब दिया, यही है दिल्ली की पहली एसी इलेक्ट्रिक बस है। न शोर और न ही वायु प्रदूषण होगा, खास बात यह है कि इस बस में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के 50 रुपये के दैनिक पास पर भी सफर कर किया जा सकता है। बैठने के लिए गुलाबी रंग की सीटें हैं।

उद्घाटन के बाद पहले दिन मंगलवार को जब सड़क पर बस उतरी तो इसमें इक्का-दुक्का यात्री ही सवार हुए, लेकिन ई-बस के लिए सभी के मन में कई सवाल थे। बस में एंट्री करने के बाद यात्रियों का स्वागत भी किया गया। इंद्रप्रस्थ डिपो से रवाना होने के बाद मंडी हाउस, बाराखंभा रोड, जनपथ, पृथ्वीराज रोड, सफदरजंग, रिंग रोड, साउथ एक्स, आश्रम से होती हुई लौटकर डिपो पहुंची।

वर्षों बाद रिंग रोड के अलावा किसी रूट पर डीटीसी ने सर्कुलर बस सेवा की शुरुआत की है। वहां मौजूद कर्मियों ने बताया कि रूट की जानकारी मिलने के बाद यात्रियों की संख्या इतनी बढ़ जाएगी कि उन्हें शायद रोकना पड़े। लो फ्लोर एसी बसों में सीसीटीवी, पैनिक बटन, धुंध को हटाने के लिए उपकरण सहित दिव्यांगों के लिए भी रैंप की सुविधा है।

इस बस में बुजुर्गों, दिव्यांगों और बच्चों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि लो फ्लोर होने के साथ जमीन से इसका ऊंचाई को करीब 3-4 ईंच और कम कर दी गई है ताकि यात्रियों को सवार होने में और अधिक सुविधा हो सके। 27 किलोमीटर के सफर में 18 स्टॉप से गुजरती हुई बस जब डिपो पहुंची तो वहां भी इसका इंतजार किया जा रहा था। एक बार की फुल चार्जिंग में बस 120-150 किलोमीटर की दूरी तय करती है

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डेढ़ घंटे में होगी फुल चार्ज, चलेगी 120 किलोमीटरः बस की बैटरी एक से डेढ़ घंटे में पूरी तरह चार्ज हो जाती है। एक बार चार्ज होने पर कम से कम 120 किलोमीटर तक चलती है। जितने भी डिपो है, उन सभी में चार्जिंग की व्यवस्था की जा रही है। बसों में महिलाओं को पैनिक बटन से भी काफी सहूलियत होगी। यह सीधे कश्मीरी गेट स्थिति सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (सीसीसी) से जुड़ा है और जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता की जाएगी

पहली इलेक्ट्रिक बस
पहली इलेक्ट्रिक बस आईपी डिपो से रवाना होने के बाद आईटीओ एजीसीआर, तिलक मार्ग, मंडी हाउस, बाराखंभा रोड, कनॉट प्लेस, जनपथ, राजेश पायलट रोड, पृथ्वीराज रोड, अरबिंदो मार्ग, सफदरजंग, रिंग रोड, साउथ एक्सटेंशन, आश्रम, भोगल, जंगपुरा, इंडिया गेट, हाई कोर्ट और प्रगति मैदान होकर गुजरती हुई फिर डिपो लौटी।

डिपो में चार्जिंग की होगी सुविधाः इलेक्ट्रिक बसों के लिए मुंडेला कलां, रोहिणी, राजघाट डिपो में चार्जिंग स्टेशन लगाने का काम चल रहा है। बुनियादी सुविधाएं तकरीबन मुहैया कर ली गई हैं। ई बसों के सर्कुलर रूट पर दिखने से इनकी तरफ लोगों का आकर्षण बढ़ने की उम्मीद है।

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हर साल कार्बन उत्सर्जन में 16 हजार टन की आएगी कमी
दिल्ली में चार महीने में 300 इलेक्ट्रिक बसें यात्रियों की सुविधा के लिए उपलब्ध होंगी। इससे पुराने वाहनों से होने वाले प्रदूषण में काफी कमी आएगी। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट की सीनियर प्रोग्राम मैनेजर(इलेक्ट्रिक मोबिलिटी) मौसमी मोहंती के मुुताबिक औसतन एक लीटर ईंधन से करीब 2.4 किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन होता है।

एक बस रोजाना औसतन करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय करती है तो साल भर में 300 बसों के चलने पर कार्बन उत्सर्जन में करीब 16 हजार टन की कमी आएगी। सीएनजी वाहनों की तुलना में यह आंकड़ा कम होगा, मगर स्वच्छ ईंधन से चलने वाली बसों से दिल्ली के पर्यावरण को आने वाले वर्षों में काफी राहत मिलने की उम्मीद है। जब दिल्ली में बसों का बेड़ा पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगा तो सालाना कार्बन उत्सर्जन में लाखों टन की बचत होगी