लुटियंस दिल्ली के धोबी घाटों का होगा आधुनिकीकरण, एनडीएमसी ने बनाया ये प्लान

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स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित किए जा रहे नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) क्षेत्र के धोबी घाट जल्द ही आधुनिक रूप में नजर आएंगे। इसके लिए एनडीएमसी ने पूरी योजना तैयार कर ली है। जिसमें न केवल इस काम में लगे लोगों के जीवन स्तर को सुधारना होगा बल्कि उनको आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराकर उनके काम को भी आसान करना होगा। जल्द ही किसी एक घाट का चयन कर धोबी घाटों के आधुनिकीकण का कार्य शुरू होगा। एनडीएमसी के सदस्य कुलजीत सिंह चहल ने बताया कि वर्तमान में हर व्यवसाय में आधुनिक मशीनें आ रही है। ऐसें जब आप आधुनिक वस्तुओं का उपयोग नहीं करते हैं तो जो प्रतिस्पर्धा चल रही है उससे आप पीछे रह जाते हैं। ऐसा ही कुछ एनडीएमसी में काम करने वाले धोबियों के साथ हो रहा है।

एनडीएमसी इलाके में 17 स्थानों 252 धोबी घाट चल रहे हैं। यहां पर 400 से अधिक लाइसेंसकृत धोबी अपनी अजीविका इस व्यवसाय के जरिये चला रहे हैं, लेकिन देखने में आ रहा है कि आधुनिक मशीनें न होने की वजह से व्यवसाय में पिछड़ रहे हैं और निजी लाउंड्री इसका लाभ उठा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग एनडीएमसी इलाके में पारंपरिक तरीके से कपड़े धोने के व्यवसाय में लगे हैं उनका कई पीढि़यों से यह व्यवसाय है।

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चहल ने बताया कि इन लोगों के व्यवसाय पर संकट न आए और वह आत्मनिर्भर बन सकें इसलिए हमने इन घाटों का चरणबद्ध तरीके से आधुनिकीकरण करने का फैसला लिया है। जिसमें निजी लाउंड्री संचालकों के विशेषज्ञों द्वारा इनका प्रशिक्षण कराया जाएगा। साथ ही कपड़ो को धोने के लिए आधुनिक मशीनें भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे इनके समय की बचत होगी ही साथ ही यह लोग निजी लाउंड्री सेवा को भी टक्कर दे पाएंगे।

उल्लेखनीय है कि एनडीएमसी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में लाउंड्री सेवाओं की मांग हैं। क्योंकि यहां पर बड़ी मात्रा में रेस्तरां और होटल हैं। जिनकी चादर से लेकर अन्य कपड़े की वस्तुएं प्रतिदिन में बड़ी मात्रा में धोने के लिए आती है। चहल ने बताया कि इस परियोजना की सबसे बड़ी बात यह होगी सारी राशि का वहन एनडीएमसी स्वयं करेगा।जल और ऊर्जा की भी होगी बचतएनडीएमसी के अनुसार जब इन घाटों का आधुनिकीकरण हो जाएगा तो उससे जल और ऊर्जा की भी बचत होगी। उन्होंने कहा कि पारंपरिक तरीके से कपड़े धोने में ज्यादा पानी खर्च होता है। जबकि मशीन से कम होता है। ऐसे में वर्तमान में जब यह लोग कपड़े धोते हैं तो हैं तो ज्यादा देर तक पानी निकालने के लिए मोटर चलानी होती है। साथ ही पानी भी अधिक खर्च होता है। मशीनें लग जाने के बाद यह नहीं होगा। जिसके परिणाम स्वरूप जल और ऊर्जा का संरक्षण होगा।

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