प्रगति के पथ पर फर्राटा भर रही है मेट्रो, अगले साल तक नेटवर्क होगा इतने किलोमीटर के पार

``` ```

दिल्ली मेट्रो ने स्थापना के 28 वर्षों के सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे। 20 वर्ष पहले 8.3 किलोमीटर क्षेत्र में शाहदरा से तीस हजारी के बीच शुरू हुई दिल्ली मेट्रो की सेवाएं वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर के शहरों में 392 किलोमीटर में पड़ने वाले 286 स्टेशनों पर यात्रियों को निर्बाध सेवाएं दे रहीं हैं। गुरुग्राम के रैपिड मेट्रो और एक्वा लाइन सहित कुल 12 अलग-अलग लाइनों पर रोजाना 50 लाख से अधिक यात्री यात्रा कर रहे हैं। नेटवर्क विस्तार की रफ्तार को बरकरार रखते हुए फेज-4 के तीनों कॉरिडोर पर भी मेट्रो निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है।

खास बात यह है कि चुनौतियों के बावजूद दिल्ली मेट्रो के इस सफर में स्वदेशी तकनीक की बदौलत पर दो लाइनों पर ड्राइवर लेस मेट्रो की शुरुआत हो चुकी है। अगले कुछ वर्षों में दिल्ली की जीवन रेखा के साथ मेट्रो लाइट, नियो मेट्रो, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) सहित सेंट्रल विस्टा परियोजना में लूप कॉरिडोर के जुड़ने से यात्रियों की सहूलियतें बढ़ जाएंगी

3 मई, 1995 को केंद्र और राज्य सरकार ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) की स्थापना की थी। इसके बाद फेज-एक, दो, तीन का कॉरिडोर का निर्माण पूरा होने के बाद फेज-4 के तीन कॉरिडोर पर तेजी से काम चल रहा है। फेज-4 के शेष तीन कॉरिडोर पर मंेजूरी का अभी भी इंतजार है। इससे दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क में बढ़ोतरी के साथ साथ दिल्ली की सड़कों से रोजाना लाखों वाहन भी कम होंगे और लोगों की जीवनशैली में भी बड़े बदलाव की उम्मीद है।

रिंग कॉरिडोर की है तैयारी
कोरोना काल में चुनौतियों के बीच दिल्ली मेट्रो के कदम नहीं रुके। पिंक लाइन के 58.6 किलोमीटर में पड़ने वाले 38 स्टेशनों के चलते यह दिल्ली का सबसे लंबा मेट्रो कॉरिडोर बन गया। मजलिस पार्क और शिव विहार के बीच मेट्रो सेवाएं शुरू होने से यात्रियों को देश के सबसे लंबे कॉरिडोर पर सफर का मौका मिलने लगा है। मौजपुर-मजलिस पार्क पर फेज-4 के तहत कॉरिडोर निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। इसके पूरा होने से पिंक लाइन का एक रिंग कॉरिडोर बन जाएगा। इससे यात्रियों के दिल्ली के किसी कोने से दूसरे कोने में पहुंचने का मौका मिलेगा।

स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भर भारत की तरफ बढ़ते कदम
रेड लाइन (शहीद स्थल-रिठाला) पर देश में विकसित पहले स्वचालित ट्रेन पर्यवेक्षण (आई-एटीएस) और सिग्नलिंग तकनीक की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। मेक इन इंडिया के तहत कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) और सिग्नलिंग तकनीक की बदौलत दिल्ली मेट्रो को ड्राइवर लेस करने में मदद मिलेगी। इससे मेट्रो परिचालन में मानवीय त्रुटियों की आशंका कम होने के साथ साथ मेट्रो की रफ्तार और तेज और सटीक होगी।

यह भी पढ़ें  दिल्ली-जयपुर के बीच का टोल रेट बढ़ने से सफर हुआ महंगा, जाने नया किराया

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में दिल्ली मेट्रो के बढ़ते कदम से दिल्ली मेट्रो का नाम दुनिया के अग्रणी मेट्रो नेटवर्क में शुमार हो गया है। अगले साल तक दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क 400 किलोमीटर से अधिक लंबा हो जाने की उम्मीद है। फेज-4 के तीनों कॉरिडोर पर करीब 65 किलोमीटर में मेट्रो निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ताकि, परियोजना को पूरा करने में न्यूनतम देरी हो।

परिचालन पर रोजाना 30 लाख यूनिट बिजली की खपत
दिल्ली एवं एनसीआर में मेट्रो परिचालन पर रोजाना औसतन 30 लाख यूनिट बिजली की जरूरत होती है। औसतन 20 लाख यूनिट बिजली दिल्ली मेट्रो को हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के डिस्कॉम से मिलती है। करीब नौ लाख यूनिट रीवा सौर ऊर्जा प्लांट से प्राप्त होती है। जबकि, औसतन 1 लाख यूनिट मेट्रो परिसर में लगे सौर पैनल से मिलती है। इसका इस्तेमाल दिल्ली मेट्रो के ट्रैक्शन एवं स्टेशन पर लगे हुए मेट्रो परिचालन संबंधी उपकरणों के लिए किया जाता है। इनमें लाइट, एसी, वेंटिलेशन, लिफ्ट, एस्कलेटर सहित दूसरे उपकरण और सेवाएं भी हैं। हाल के बिजली संकट की आशंका को देखते हुए डीएमआरसी ने बताया कि आपातकालीन स्थिति के लिए भी सभी इंतजाम हैं। डीएमआरसी ट्रैक्शन में एक लाइन पर औसतन 4 सब स्टेशन होते हैं। अगर एक फेल हो जाता है तो दूसरे सब स्टेशन से बिजली की आपूर्ति की जाती है। अगर इसके बाद भी जरूरत हुई तो डीजी सेट्स का उपकरणों के लिए उपयोग किया जाता है।

ये हैं खूबियां
आईएसओ 14001 प्रमाण-पत्र अर्जित करने में सफल रही है, जो सुरक्षा और पर्यावरण की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है
सितंबर 2011 में संयुक्त राष्ट्र ने ग्रीन हाउस गैसों में कमी लाने के लिए दिल्ली मेट्रो को दुनिया का पहला कार्बन क्रेडिट दिया। इसके तहत, उसे सात सालों के लिए 95 लाख डॉलर मिलेंगे
पिंक और मजेंटा लाइन पर ड्राइवर लेस मेट्रो का परिचालन हो रहा है। फेज-4 की सभी कॉरिडोर पर ड्राइवर लेस मेट्रो चलेगी
यमुना पर लगातार बन रहे हैं पुल, सिग्नेचर ब्रिज के ऊपर भी पुल का निर्माण किया जा रहा है
आत्म निर्भर भारत के लिहाज से दिल्ली मेट्रो ने कई स्वदेशी परियोजनाओं में पहल की है

दिल्ली की 10 लाइनों पर मेट्रो सेवाएं

ब्लू लाइन-द्वारका सेक्टर-21 से नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी
ब्लू लाइन-यमुना बैंक से वैशाली
रेड लाइन-शहीद स्थल-रिठाला
येलो लाइन-समयपुर बादली-हुडा सिटी सेंटर
ग्रीन लाइन-इंद्रलोक/कीर्ति नगर-बिग्रेडियर होशियार सिंह
वॉयलेट-कश्मीरी गेट-राजा नाहर सिंह
एयरपोर्ट एक्सप्रेस-द्वारका सेक्टर-21 से नई दिल्ली
पिंक : मजलिस पार्क-शिव विहार
मजेंटा लाइन-जनकपुरी पश्चिम-बॉटेनिकल गार्डन
ग्रे लाइन-द्वारका-ढांसा बस स्टैंड
रैपिड मेट्रो, एक्वा लाइन पर भी मेट्रो का एनसीआर के शहरों में परिचालन हो रहा है

यह भी पढ़ें  दिल्ली के वजीराबाद रोड को किया सिग्नल फ्री, भोपुरा से लेकर भजनपुरा तक लोगों को ट्रैफिक जाम से निजात