दिल्ली-मेरठ रीजनल रेल कारिडोर के स्टेशनों के आसपास बसाई जाएंगीं छोटी‘कालोनियां’, लोगों को मिलेंगे फ्लैट

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नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। दिल्ली-मेरठ रीजनल रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कारिडोर के ऐसे स्टेशनों के आसपास छोटी ‘कालोनियां’ बसाई जाएंगी,

जहां खाली जगह उपलब्ध है। इन कालोनियों में बहुमंजिला आफिस, रिहायशी ब्लाक, स्कूल, अस्पताल, मार्केट, पार्क आदि होंगे। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) के तहत

निगम फिलहाल राजधानी के तीन स्टेशनों-आनंद विहार, सराय काले खां और जंगपुरा के आसपास कालोनियां विकसित करने की दिशा में काम करेगा।

जंगपुरा के लिए तो कंसल्टेंट की नियुक्ति भी हो गई है, जबकि आनंद विहार और सराय काले खां के कंसल्टेंट के लिए टेंडर निकाला गया है।

राष्ट्रीय मेट्रो रेल नीति-2017 के तहत टीओडी के तहत इन तीनों स्टेशनों के आसपास खाली जगह को पर्यावरण अनुकूल, अनिवार्य सुविधाओं से युक्त और पैदल यात्रियों के अनुकूल

विकसित करने की योजना है।  इसके निमित्त ‘प्रभाव क्षेत्र योजना’ (आइजेडपी) बनाई जाएगी। इसे प्रत्येक टीओडी साइट की विशेषताओं और संदर्भ के अनुकूल बनाया जाएगा।

इनमें विभिन्न क्षेत्रों के सुधार कार्यो, जैसे- सड़क चौड़ीकरण (यदि बुनियादी ढांचे में वृद्धि के लिए आवश्यक हो), बहु-उपयोगिता वाले क्षेत्रों को शामिल करने के लिए

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सार्वजनिक सड़कों का उन्नयन, पैदल राहगीरों से जुड़ी सुविधाएं विकसित करना आदि शामिल हैं।एनसीआरटीसी अधिकारियों ने बताया कि आनंद विहार स्टेशन ट्रांजिट हब भी

होगा, क्योंकि यहां रैपिड ट्रेन के साथ बस अड्डा और रेलवे स्टेशन भी है। करीब एक किलोमीटर की दूरी पर कड़कड़डूमा मेट्रो स्टेशन भी है।

उन्होंने बताया कि कंसल्टेंट की नियुक्ति के बाद तीनों जगह की डीपीआर तैयार कर उस पर स्वीकृति के बाद आगे का काम शुरू होगा।एनसीआरटीसी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी

पुनीत वत्स ने बताया कि आरआरटीएस कारिडोर तेज गति, सुरक्षित और आरामदायक यात्र की सुविधा प्रदान करने के साथ कारिडोर के क्षेत्र और उसके आसपास निवेश के नए

अवसर भी खोलेगा। इससे स्थानीय लोगों को लाभ होगा। ट्रांजिट स्टेशनों और कारिडोर के आसपास सघनता आएगी, जिससे नए क्षेत्रों का तेजी से विकास होगा।

उन्होंने बताया कि हितधारकों की भागीदारी को ध्यान में रखते हुए ‘प्रभाव क्षेत्र’ को विकसित करने का प्रस्ताव लाया गया है।

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क्या है टीओडी योजना टीओडी योजना का उद्देश्य गाड़ियों के कम से कम इस्तेमाल करने के लिए लोगों को बढ़ावा देना है। इसके तहत लोगों को एक ही परिसर में रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधियों की

सुविधा मिलेगी। एक ही परिसर में आफिस, घर, पार्क से लेकर ट्रांसपोर्ट तक की सुविधा होगी, तो लोग निजी वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करेंगे।योजना के लिए मेट्रो स्टेशन के

500 से 800 मीटर के पास करीब एक हेक्टेयर जमीन का होना जरूरी है। यहां 300 से 500 तक एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) स्वीकृत होगा।

इसमें आम लोगों की रिहायश के लिए 30 प्रतिशत, जबकि ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लिए 15 प्रतिशत एफएआर होना जरूरी है।