दिल्ली की जनता को करने जाम से मुकत, आया है ITMS

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ITMS एक ऐसी तकनीक है जो वास्तविक समय में ट्रैफिक का आकलन करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करती है. इसके जरिए लोगों को रियल टाइम ट्रैफिक की जानकारी दी जाएगी.

Intelligent Transport Management System: 

दिल्ली की सभी समस्याओं में से ट्रैफिक की समस्या प्रमुख है और दिन प्रतिदिन यह और विकराल होती जा रही है. लेकिन अब दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है.  

दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू करने की दिशा में पहला कदम उठाते हुए ट्रैफिक पुलिस ने मंगलवार को कहा कि 850 ट्रैफिक चौराहों का सर्वे शुरू कर दिया गया है.

वहीं महत्वपूर्ण सड़कों पर क्रॉसिंग और मौजूदा सड़क बुनियादी ढांचे का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा. बता दें कि इस परियोजना पर काम एक दशक पहले शुरु किया गया था, अब यह परियोजना अपने अंतिम चरण में है.

जून में शुरू हुआ सर्वेक्षण
ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि इस सर्वेक्षण के समझौते पर मार्च में ज्ञापन देकर हस्ताक्षर किए गए थे, वहीं सर्वेक्षण जून में शुरू हुआ था.

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सर्वेक्षण में दिल्ली में मौजूदा ट्रैफिक व्यवस्था के साथ-साथ मुख्य सड़कों पर वाहनों की मात्रा का विस्तृत विश्लेषण शामिल होगा. विस्तृत सर्वेक्षण के पहले चरण में इस समय महत्वपूर्ण ट्रैफिक चौराहों का विश्लेषण किया जा रहा है.

सिस्टम पहले कर देगा अलर्ट
गौरतलब है कि दिल्ली में लगभग 850 चौराहे और 480 ब्लिंकर सिग्नल पॉइंट हैं, जो कुल मिलाकर लगभग 1,400 सड़क जंक्शन बनाता है.

ट्रैफिक की मात्रा, सड़क पर औसत गति, सड़क का उपयोग करने वाले पैदल चलने वालों की संख्या, ठहराव का समय और जंक्शन को पार करने में लगने वाले औसत यात्रा समय का पता लगाने के लिए एक अध्ययन किया जाएगा.

सर्वेक्षण क्षेत्र और ट्रोपोग्राफी के आधार पर वास्तविक समय में संभावित ट्रैफिक मूवमेंट की भविष्यवाणी करने के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली का भी अध्ययन करेगा.

ITMS एक ऐसी तकनीक है जो वास्तविक समय में ट्रैफिक का आकलन करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करती है. इसके लागू होने से दिल्ली में ट्रैफिक का सिस्टम परिदृश्य बदलने की संभावना है. लोगों को रियल टाइम ट्रैफिक की जानकारी दी जाएगी.

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सर्वेक्षण की रिपोर्ट साल के अंत में
स्पेशल कमिश्नर (ट्रैफिक) सुरेंद्र सिंह यादव ने कहा, ‘सर्वेक्षण रिपोर्ट साल के अंत तक सौंप दी जाएगी. उन्होंने कहा कि अध्ययन में यह भी देखा जाएगा कि वाहन की उपस्थिति का पता लगाने,

वाहन की गिनती, वर्गीकरण, वाहनों के कतार की लंबाई की निगरानी और स्पीड और दिशा के लिए कैमरा और 4 डी रडार-आधारित सेंसर कैसे ट्रैफिक फ्लो और प्रबंधन को समझने में मदद करेगा.

इसमें एक वीडियो आधारित घटना का पता लगाने वाला सिस्टम भी होगा और सर्वेक्षण इस बात पर विचार करेगा कि इसे कैसे लागू किया जा सकता है.