केंद्र सरकार ने रोजगार के अवसर को बढ़ाते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों की नई नीति की घोषित

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नई दिल्ली:आज देश में बिजली से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार भी इस मामले में कई तरह के सराहनीय कदम उठा रही है।

आमतौर पर कई लोग बिजली से चलने वाले वाहनों को इसलिए नहीं खरीदना चाहते हैं क्यूंकि इन वाहनों को चार्ज करने की पर्याप्त सुविधा नहीं है।

ऐसे में केंद्र सरकार ने अब बिजली से चलने वाले वाहनों को लेकर एक नई नीति को घोषित कर दिया गया है जिसके तहत

देश में हर 3 वर्ष किमी पर चार्जिंग स्टेशन की सुविधा देने की बता कही गई है। आइए जानते हैं खबर को विस्तार से।

इलेक्ट्रिक वाहनों की नई नीति घोषित

दरअसल हाल ही में केंद्र सरकार की और से इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर नई नीति बनाई गई है। इस नीति के मुताबिक अगले पाँच वर्षों में सभी राज्यों की राजधानी, बड़े शहरों, राष्ट्रीय

राजमार्गों और राजमार्गों पर चार्जिंग स्टेशन लगाए जाने वाले हैं। सरकार का उद्देश्य शहरों में हर 3 वर्ष किमी के क्षेत्र में चार्जिंग स्टेशन बनाए जाने का है।

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वहीं राष्ट्रीय राजमार्गों पर 25 किमी और 100 किमी के क्षेत्र में एक फास्ट चार्जिंग स्टेशन की सुविधा देना पर काम किया जा रहा है।

हर किसी को मिलेगी चार्जिंग स्टेशन लगाने की छूट

नीति को अक्टूबर 2019 में भी जारी किया गया था लेकिन अब इसमें कई संशोधन किए गए हैं। इस बार चार्जिंग शुल्क को भी कम रखे जाने की बात कही गई है ताकि आम जनता

भी बिजली के वाहनों का इस्तेमाल कर सके। वहीं नीति के तहत सरकारी जमीन पर भी चार्जिंग स्टेशन लगाने की छूट दी गई है।

सभी को सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन शुरू करने की छूट दी गई है। जिसके लिए कोई लाइसेंस भी नहीं चाहिए। लेकिन सरकार द्वारा तय मानकों को मानना पड़ेगा।

जमीन देने वाले को भी होगा भुगतान

नियमों के मुताबिक चार्जिंग स्टेशन के लिए कम दामों पर जमीन देने की बात भी शामिल है। इस नीति में रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल का भी प्रस्ताव दिया गया है

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जिसमें जमीन देने वाले, चार्जिंग स्टेशन लगाने वाले और सुविधा देने वाली कंपनियों के बीच राजस्व दिया जाएगा। जमीन देने वाली एजेंसी को भी 1 रुपये प्रति किलो वाट की दर

से चार्जिंग शुल्क का भुगतान किया जाएगा। मेट्रो शहरों में आवेदन के 7 दिनों बाद ही बिजली देने की बात भी नीति में शामिल है। वहीं नगर निगम क्षेत्रों में 15 दिन और गाँव में एक महीने का समय दिया गया है।

बिजली कंपनियों को भी मिलेगा शुल्क

नीति के तहत बिजली कंपनियाँ भी चार्जिंग स्टेशनों से तय शुल्क ही ले सकेंगी। जो 31 मार्च 2025 तक बिजली आपूर्ति का औसत होगा।

इस शुल्क के निर्धारण की ज़िम्मेदारी को राज्य सरकारों को सौंपा गया है। वहीं कोई भी चार्जिंग स्टेशनों को कनेक्शन देने से इंकार भी नहीं कर सकता।