वंदे भारत एक्सप्रेस का ट्रायल रहा सफल,अब 115 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी दिल्ली से चंडीगढ़

``` ```

रेलवे ने शुक्रवार को न्यू मोरिंडा से साहनेवाल के बीच में वंदे भारत एक्सप्रेस का ट्रायल किया। इसे दोनों स्टेशनों के बीच 115 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ाया गया।

ट्रेन ने 40 किमी की दूरी को महज 20.86 मिनट में तय किया।वंदे भारत एक्सप्रेस से सफर करने वाले यात्री चंडीगढ़ से दिल्ली मात्र 2.30 घंटे में पहुंचेंगे।

वहीं चंडीगढ़ की वीवीआईपी शताब्दी एक्सप्रेस अभी सवा तीन घंटे में दिल्ली पहुंचाती है। वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन होने से 45 मिनट की बचत होगी।

इसे दौड़ाने की युद्धस्तर पर तैयारी चल रही है। यह ट्रेन 2023 तक पटरी पर आ सकती है। रेलवे ने शुक्रवार को न्यू मोरिंडा से साहनेवाल के बीच में वंदे भारत एक्सप्रेस का ट्रायल किया।

इसे दोनों स्टेशनों के बीच 115 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ाया गया। ट्रेन ने 40 किमी की दूरी को महज 20.86 मिनट में तय किया।

देश में निर्मित पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत की औसत स्पीड शताब्दी से 10 किलोमीटर प्रति घंटा से भी ज्यादा है। जबकि शताब्दी का चंडीगढ़ से दिल्ली के बीच औसत स्पीड

यह भी पढ़ें  टंकी फूल करवाने से पहले ध्यान दे. घट सकता हैं 20 रुपया तक पेट्रोल प्रति लीटर

90 किमी प्रति घंटा है। यदि वंदे भारत एक्सप्रेस चलेगी तो इसका औसत स्पीड 100 किमी प्रति घंटे से ज्यादा होगा।

115 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस
वंदे भारत एक्सप्रेस के ट्रायल की शुरुआत 40 किमी की रेंज में 0-80 किमी प्रति से हुई। ट्रेन को खमाणो, लालकलां व समराला के बीच 115 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया गया।

यह जानकारी डीआरएम जीएम सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि ट्रायल सफल रहा। बता दें कि अभी पिछले सप्ताह चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्टरी में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका

निरीक्षण किया था। जांच में सही पाए जाने के बाद इसे चंडीगढ़ लाया गया। जिसका लखनऊ से रिसर्च डिजाइन स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) की टीम ने ट्रायल किया है।

शताब्दी और वंदे भारत एक्सप्रेस में कुछ प्रमुख अंतर
●शताब्दी की तुलना में 180 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से दौड़ने में सक्षम
●वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को मिलेगी ऑनबोर्ड वाईफाई की सुविधा
●शताब्दी के कोचों की लाइफ 25 साल, वंदे भारत एक्सप्रेस की 35 साल ●शताब्दी की तुलना में वंदे भारत एक्सप्रेस के दरवाजे पूरी तरह से आटोमेटिक हैं
●वंदे भारत एक्सप्रेस में समस्या आएगी तो लोको पायलट सूचना दे पाएगा, शताब्दी में ऐसा नहीं
●वंदे भारत एक्सप्रसे इंजन रहित ट्रेन है, जबकि शताब्दी में इंजन लगा हुआ है। ●वंदे भारत एक्सप्रेस में जीपीएस आधारित उन्नत प्रणाली की सुविधा है, शताब्दी में नहीं है
●शताब्दी की अपेक्षा वंदे भारत एक्सप्रेस में दिव्यांगों के लिए अनुकूल स्थान उपलब्ध है

यह भी पढ़ें  दिल्ली से कोटला के बीच इन 16 रूटो की बस सेवा हुई बंद, जल्द देखे लिस्ट और चुन ले अपना दूसरा विकल्प।

वंदे भारत की कुछ विशेषताएं
●इसकी डिजाइनिंग ऐसे की गई है कि यात्री ड्राइवर के केबिन की झलक देख सकें।
●ट्रेन की पैंट्री में भोजन और पेय पदार्थों को गर्म-ठंडा करने के लिए बेहतर गुणवत्ता के उपकरण भी दिए गए हैं।
●ट्रेक के डिब्बों के बीच के गैप को पूरी तरह से सील किया गया है, जो शोर को कम करने में मदद करेगा।
●ट्रेन के कोच में टच कंट्रोल के साथ रीडिंग लाइट दी गई है।
कंप्यूटराइज्ड एयरोडायनामिक ड्राइवर का केबिन है।