दिल्ली से जयपुर इलेक्ट्रिक हाइवे के दूसरे और अंतिम चरण के ट्रायल रन की शुरूआत कर दी है जानें NHEV की योजना

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नेशनल हाइवे फॉर इलेक्ट्रिकल व्हिकल ने शुक्रवार से दिल्ली से जयपुर ई हाइवे के लिए दूसरे और अंतिम चरण के ट्रायल रन की शुरूआत कर दी है।

इसकी शुरूआत इंडिया गेट से की गई। नेशनल हाइवे फॉर इलेक्ट्रिकल व्हिकल (एनएचईवी) ने शुक्रवार से दिल्ली से जयपुर ई हाइवे के लिए दूसरे और अंतिम चरण के ट्रायल रन

की शुरूआत कर दी है। इसकी शुरूआत इंडिया गेट से की गई। इसमें 278 किलोमीटर हाइवे पर इलेक्ट्रिक बस और कार को एक महीने के लिए वहां लगे चार्जर और तकनीक के साथ ट्रायल किया जाएगा। 

इस ट्रायल रन का उद्देश्य 270 किलोमीटर लंबे दिल्ली जयपुर हाइवे के साथ इलेक्ट्रिक व्हिकल्स के बुनियादी ढांचे की आर्थिक व्यवहार्यता को समझना है। एनएचईवी के द्वारा इस

टेक-ट्रायल रन का पहला चरण पिछले साल यमुना एक्सप्रेसवे पर दिल्ली-आगरा के बीच हाइवे पर आयोजित किया गया था।एनएचईवी के प्रोग्राम डायरेक्टर अभिजीत सिन्हा ने कहा,

“दिल्ली-आगरा हाइवे पर 210 किलोमीटर के पिछले टेक-ट्रायल रन के बाद, 278 किलोमीटर की दूरी तय करने वाला वर्तमान ट्रायल रन-II तकनीकी और वाणिज्यिक दोनों

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पहलुओं का परीक्षण करेगा। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण भारतीय राजमार्गों को ईवी-राजमार्ग में बदलने में सुविधा प्रदान करेगा।

ये इलेक्ट्रिक हाइवे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से गुजरेगा। पूरे सफर के दौरान यहां 20 चार्जिंग स्टेशन और 10 इंका डिपो बनाए जाने की तैयारी है।

सिन्हा ने कहा कि इस कॉमर्शियल ट्रायल से देश के पहले पांच सौ किलोमीटर के इलेक्ट्रिक हाइवे बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।उन्होंने कहा कि इस ट्रायल में प्रत्येक स्तर के भागीदारों

के हितों को सुरक्षित किया जाएगा, जिसमें इलेक्ट्रिक गाड़ियों के यूजर, इलेक्ट्रिक कार के यात्री स्टेशन, कैब सर्विस के ऑपरेटर स्टेशन और इन्फ्रा के निवेशक व बैंक और राज्य व केंद्र सरकार प्रमुख हैं।

शुरुआती चरणों में एनएचईवी 500 किलोमीटर तक के राजमार्गों पर टेक-ट्रायल रन चला रहा है। टेक ट्रायल रन एक महीने के लिए एनएचईवी पार्टनर न्यूगो (NueGo) इलेक्ट्रिक

मोबिलिटी कोच के साथ आयोजित किया जाएगा और इसमें राजमार्गों पर इलेक्ट्रिक व्हिकल्स से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा। इन ट्रायल के दौरान इलेक्ट्रिक व्हिकल्स

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की तकनीकी, आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक व्यवहार्यता का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद निष्कर्षों और सिफारिशों वाली एक विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमंत्री के समक्ष विचार के लिए सरकार को प्रस्तुत की जाएगी।