हरियाणा में शराब पीने वाले की हुई मौज,आधे से भी कम दाम में मिल रही है। Branded शराब। जाने रेट और कहा मिल रही है।

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आयातित विदेशी शराब पर वैट 10 प्रतिशत से घटाकर तीन प्रतिशत और देशी शराब, वाइन, बीयर और आइएमएफएल पर 13 व 14 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत किया गया है। हरियाणा सरकार ने नई आबकारी पालिसी में बार लाइसेंस के शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है

हरियाणा मंत्रिमंडल की सीएम मनोहर लाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को बैठक हुई। बैठक में सरकार के कई अहम फैसलों पर मोहर लगी।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने राज्य की नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है। वाइन पर आयात शुल्क घटा दिया गया है। नई आबकारी नीति के बाद राज्य में शराब सस्ती हो जाएगी।

कोरोना काल में शराब की अवैध बिक्री और तस्करी से सबक लेते हुए हरियाणा सरकार ने इसके तमाम छिद्र बंद कर दिए हैं। राज्य में शराब सस्ती कर दी गई है। साथ ही शराब ठेकेदारों को भी सरकार ने काफी राहत दी है, ताकि वह शराब की अवैध बिक्री के लिए मजबूर न हो सकें।



प्रदेश सरकार ने वाइन पर आयात शुल्क को सात रुपये से घटाकर दो रुपये प्रति बोतल कर दिया गया है। अब राज्य में शराब बनाने का कारखाना स्थापित करना भी आसान होगा। इसके लिए पहले जो लाइसेंस फीस 15 लाख रुपये लगती थी, उसे घटाकर मात्र एक लाख रुपये कर दिया गया है

आयातित विदेशी शराब पर वैट 10 प्रतिशत से घटाकर तीन प्रतिशत और देशी शराब, वाइन, बीयर और आइएमएफएल पर 13 व 14 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत किया गया है। हरियाणा सरकार ने नई आबकारी पालिसी में बार लाइसेंस के शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।


मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में साल 2022-23 की आबकारी नीति को स्वीकृति प्रदान की गई। उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला आबकारी एवं कराधान विभाग के भी मंत्री हैं। नई आबकारी नीति 12 जून से आरंभ होकर 11 जून 2023 तक लागू रहेगी।

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साल 2020-21 में 6791.98 करोड़ रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2021-22 में 7938.8 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व एकत्र हुआ है, जो 17 प्रतिशत अधिक है। साल 2022-23 में शराब के सस्ती होने के बावजूद चोरी रुकने से राजस्व में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

शराब की अंतर्राज्यीय आवाजाही के बेहतर नियंत्रण के लिए ट्रांजिट स्लिप शुरू की जाएगी। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि 2022-23 में खुदरा क्षेत्र (अधिकतम चार खुदरा दुकानों) की ई-निविदा के माध्यम से शराब के ठेकों की नीलामी की जाएगी। वह ब्रांड या लेबल, जिनमें पिछले वर्ष की तुलना में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, उनको अनुमोदित करने की शक्तियां डीइटीसी को सौंपी गई हैं।

शराब कारखानों को त्रैमासिक आधार के बजाय अब वार्षिक आधार पर अतिरिक्त पारियों में संचालन की अनुमति प्रदान की जाएगी। इससे इंस्पेक्टरी राज पर रोक लगेगी। लाइसेंसों का नवीनीकरण करने की शक्तियां डीइटीसी को सौंपी गई हैं। नए ब्रांड का अनुमोदन आननलाइन होगा।

बार लाइसेंस के शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं
उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के अनुसार सरकार कम मादक पेयों को ही प्रोत्साहित करेगी। शराब कारखाना स्थापित करने के लिए आशय पत्र का शुल्क 15 लाख रुपये से घटाकर एक लाख रुपये किया गया है। सरकार ने बार लाइसेंस के शुल्क में कोई वृद्धि नहीं की है।

मोरनी को उन स्थानों की सूची में जोड़ा गया है, जहां पर्यटन और साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए बार लाइसेंस दिए जा सकेंगे। राज्य में कहीं भी स्थित बार और क्लब अब बार लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं। बार और खुदरा विक्रेता अब अतिरिक्त शुल्क का भुगतान कर लंबे समय तक अपना संचालन कर सकेंगे।
सीएल और आइएमएफएल का मूल कोटा 1100 लाख प्रूफ लीटर और 650 लाख प्रूफ लीटर होगा, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग चार प्रतिशत अधिक है।

व्हिस्की और वाइन के आबकारी शुल्क में भी कमी
डिस्टिलरीज को आवंटित देशी शराब का कोई निर्धारित कोटा नहीं होगा। इसलिए लाइसेंसधारकों को किसी भी डिस्टिलरी के ब्रांड चुनने की पूरी आजादी होगी।
देशी शराब (सीएल) और आइएमएफएल के थोक लाइसेंसों के लाइसेंस शुल्क में मामूली वृद्धि होगी।- मेट्रो शराब, जिसमें मामूली वृद्धि हुई है, उसे छोडक़र, देशी शराब और आइएमएफएस के अधिकतर ब्रांड के न्यूनतम खुदरा बिक्री मूल्य में कोई बदलाव नहीं होगा।
अधिकतर आइएमएफएल ब्रांड के आबकारी शुल्क में कोई वृद्धि नहीं हुई।
तस्करी रोकने को व्हिस्की और वाइन के आबकारी शुल्क को 225 रुपये प्रति पीएल/बीएल से घटाकर 75 रुपये प्रति पीएल/बीएल किया गया है।
बारों की आपूर्ति के लिए असेंसमेंट शुल्क को भी कम किया गया है।
हाई सिक्योरिटी सीसीटीवी की निगाह में कारखाने
शहरी क्षेत्रों में सरकारी एजेंसियों की भूमि का किराया 500 मीटर से कम आकार के मामले में कलेक्टर दर का 6 प्रतिशत वार्षिक होगा।
उच्च सुरक्षा वाले होलोग्राम के साथ ट्रक व ट्रैक सिस्टम क्रियान्वित रहेगा।
सभी डिस्टिलरी और बाटलिंग प्लांट में फ्लो मीटर लगेंगे।
शराब कारखाने हाई सिक्योरिटी सीसीटीवी की नजर में रहेंगे।
सभी शराब ठेकों और बार में प्वाइंट आफ सेल (पीओएस) मशीनें लगेंगी, ताकि उनके बिल दिए जा सकें।
कारोबारियों को सहूलियत

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कारोबार की सहूलियत के लिए ठेकेदारों को मिलेगी सिंगल विंडो
1980 से पहले अनाधिकृत तरीके से आवंटित किए गए प्लाटों को किया जाएगा नियमित
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